गुरुवार, 26 जुलाई 2012
वास्तुदोष का निवारण करने के उपाय
वास्तु दोष निवारण के सफल/सामान्य उपाय/टोटके/तरीके
वास्तु दोष निवारण के कुछ सरल उपाय
सोमवार, 16 जुलाई 2012
vastu
वास्तु दोश निवारण के उपाय
अपना मकान बनाते समय भूल या परिस्थितिवष कुछ वास्तुदोश रह जाते है। इन दोशों के निवारण के लिए यदि आप बताएं जा रहे उपाय कर लें, तो बिना तोड-फोड़ के ही वास्तुजनित दोशों से निजात पा सकते हैं।
ऽ यदि आपके मकान के सामने किसी प्रकार का वेध यानी खंभा, बड़ा पेड़ या बहुमंजिला इमारत हो तो इसकी वजह से आपका स्वास्थ्य या आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। यदि वेघ दोश हो तो निम्न उपाय करना कारगर होगा।
ऽ अपने मकान के सामने लैम्प पोस्ट लगा लें। यदि संभव नहीं हो, तो घर के आगे अषोक का वृक्ष और सुगधित फूलों के पेड़ के गमले लगा दें। तुलसी का पौधा स्वास्थ्य के लिए षुभ होता है।
ऽ यदि कोई बहुमंजिली इमारत आपके सामने हो, तो फेंगषुई के अनुसार अश्ट कोणीय दर्पण, किस्टल बाल तथा दिषा सूचक यंत्र लगा सकते है।
ऽ बड़ा गोल आईना मकान की छत पर ऐसे लगाए कि मकान की संपूर्ण छाया उसमें दिखाई देती रहे।
ऽ यदि मकान के पास फैक्टरी का धुआं निकलता हो, तो एग्जास्ट पंखा या वृक्ष लगा लें।
ऽ यदि मकान में बीम ऐसी जगह हो जिसके कारण आप मानसिक तनाव महसूस करते हो तो बीम से उत्पन्न होने वाले दोशो से बचाव के लिए यह उपाय अपना सकते है।
ऽ षयनकक्ष मे बीम हो तो इसके नीचे अपना बैड या डाइनिंग टेबल नहीं लगाएं। यदि ऑफिस हो तो मेज व कुर्सियां नहीं रखे।
ऽ बीम के दोनों ओर बांसुरी लगा दें। इससे वास्तुदोश निवारण हो जाता है।
ऽ पवन घंटी बीम के नीचे लटका दें या बीम को सीलिंग टायलस से ढक दें।
ऽ यदि मकान का कोई कोना आपके मुख्य द्वार के सामने आए, तो स्पॉट लाइट लगाएं। जिससे प्रकाष आपके घर की ओर रहे तथा सीधा उंचा वृक्ष लगा दें।
ऽ षयनकक्ष में घी का दीपक व अगरबत्ती करें जिससे मन प्रसन्न रहे। इस बात का ध्यान रखें कि झाडू षयनकक्ष में नहीं रखें।
ऽ यदि मकान में दिषा संबंधी कोई दोश हो तो इससे बचने के लिए ये उपाय करने से लाभ मिलना संभव है।
ऽ मकान में मुख्य द्वार पर देहरी बना लें। इससे बुरे व अन्य दोश घर मे प्रवेष नहीं कर पाते।
ऽ ईषान कोण के दोश के लिए इस दिषा में पानी से भरा मटका रखे। इस कोण को साफ सुधरा रखे।
ऽ अग्नि कोण दोश निवारण के लिए कोने में एक लाल रंग का बल्ब लगा दें जो दिन रात जलता रहें
ऽ वायव्य कोण दोश निवारण के लिए इस ओर की खिड़कियां खुली रखें, ताकि वायु आ सके। एजॉस्ट पंखा भी लगा सकते है।
ऽ नैऋत्य कोण दोश निवारण के लिए इस कोने को भारी बनाएं। स्टोर बनाना यहां षुभ होता है।
ऽ षयनकक्ष में दर्पण का प्रतिबिंब पलंग पर न पडे तथा डबल बेड पर एक ही गद्दा रखें, तो ठीक रहेगा।
ऽ पति पत्नि में प्रेम के लिए प्रेमी परिंदे का चित्र या मेडरिन बतख का जोड़ा रखे अथवा सपरिवार प्रसन्नचित मुद्रा वाला चित्र लगाएं।
ऽ डायनिंग टेबल को प्रतिबिंबित करने वाला आईना आपके सद्भाव व भाग्य मंे वृद्धि करता है, इसे लगाएं।
वास्तुषास्त्री विनय कुमार जैन मो 9910938969
गुरुवार, 28 जून 2012
सोमवार, 25 जून 2012
aarkshan ka vikram betal
जब सभी क्षेत्रो मे गुणवत्ता चाहिए फिल्मो में सुंदर नायिका चाहिए, कुष्ती में तगड़ा पहलवान चाहिए, क्रिकेट में जबरदस्त बल्लेबाज चाहिए, जब षादी में कमनीय पत्नी चाहिए तो एक डॉक्टर जो लोगो की जान बचाएगा और स्वास्थ्य रखा करेगा, बडे़ बडे़ षोध अनुसन्धान करेगा और देष का नाम उॅचा करेगा और मानवता को बहुत कुछ प्रदान भी करेगा, के लिए सबसे उच्च गुणवत्ता नहीं होना चाहिए? क्या ऐसे स्थानो पर आरक्षण को पूरी तरह हटा लिया नहीं जाना चाहिए और वहां पर आरक्षण के नाम पर राजनीति करने वालो पर कानूनी कार्यवाही नहीं करनी चाहिए? एक मौका मिलते ही चिकित्सको और स्वयं स्थापित समर्थ षिक्षिको को अपमानित करने का मौका न चूकने वाले मीडिया से मै ये पूछना चाहूॅगा कि ये गन्दी राजनीति षैक्षणिक केन्द्रों से दूर होगी या नहीं? पर जिस तरह से देष का हर कोना सड़ चुका है और लुहेड़ाबाजी करने वालो को कुछ भी मनमानी करने की छूट मिल गयी है अपने अलग ही पैमाने बनाने वाला मीडिया भ्रश्ट विचार फैलाने में पूरा योगदान कर रहा है उससे यही लगता है की हारे कुंठितो को अपनी भड़ास निकालने का मौका आगे भी मिलता रहेगा।
आखिर देष के प्रबुद्ध, विचारषील और षिक्षितो को राज्य नीति एवं सामाजिक मार्गदर्षन के लिए वरीयता कब दी जाएगी?
आखिर कब तक भ्रश्ट, गंवार, अपराधी और निकृश्ट राजनीतिज्ञ और उनके चेले चपाटे देष को पथभ्रश्ट करते रहेगे?
आखिर कब तक ये आरक्षण का वेताल विक्रमादित्य के कंधे पर लटका रहेगा और समूचे देष को ष्मषान बनाये रहेगा?
आखिर कब देष के अन्य प्रबुद्धो की ऑख खुलेगी।
आखिर कब तक गुण और योग्यता का अपमान देष सहता रहेगा?
आखिर कब तक एक अन्याय के नाम पर दूसरा बड़ा अन्याय किया जाता रहेगा?
आखिर कब तक किसी परदादे के दोश की सजा उसके संतानो को दी जाती रहेगी?
आखिर कब तक नेता और सरकारे अपनी अक्षमता को आरक्षण देकर जनता को मूर्ख बनाते रहेंगे?
आखिर हम किस तरह की बराबरी चाहते है? या नेताओ के दुराग्रह से बराबरी आ जाएगी?
आखिर कब बंद होगा ये षासकीय अत्याचार?
विनय कुमार जैन
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रविवार, 24 जून 2012
janm jra mratu hai- muni pulaksagar
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